मन के अंदर पी बसे पी के अंदर प्रीत
ख़ुद में इतना डूब जा मिल जाएगा मीत
इब्राहीम अश्क
मुझे न देखो मिरे जिस्म का धुआँ देखो
जला है कैसे ये आबाद सा मकाँ देखो
इब्राहीम अश्क
न दिल में कोई ग़म रहे न मेरी आँख नम रहे
हर एक दर्द को मिटा शराब ला शराब दे
इब्राहीम अश्क
नाम को भी न किसी आँख से आँसू निकला
शम्अ महफ़िल में जलाती रही परवाने को
इब्राहीम अश्क
नहीं है तुम में सलीक़ा जो घर बनाने का
तो 'अश्क' जाओ परिंदों के आशियाँ देखो
इब्राहीम अश्क
पत्थर में भी आग है छेड़ो तो जल जाए
जो इस आग में तप गया वो हीरा कहलाए
इब्राहीम अश्क
प्यासी धरती देख के बादल उड़ उड़ जाए
ये दुनिया की रीत है तरसे को तरसाए
इब्राहीम अश्क

