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इम्दाद इमाम असर शायरी | शाही शायरी

इम्दाद इमाम असर शेर

28 शेर

पा रहा है दिल मुसीबत के मज़े
आए लब पर शिकवा-ए-बेदाद क्या

इम्दाद इमाम असर




ख़ूब-ओ-ज़िश्त-ए-जहाँ का फ़र्क़ न पूछ
मौत जब आई सब बराबर था

इम्दाद इमाम असर




कुछ समझ कर उस मह-ए-ख़ूबी से की थी दोस्ती
ये न समझे थे कि दुश्मन आसमाँ हो जाएगा

इम्दाद इमाम असर




लोग जब तेरा नाम लेते हैं
हम कलेजे को थाम लेते हैं

इम्दाद इमाम असर




मर ही कर उट्ठेंगे तेरे दर से हम
आ के जब बैठे तो फिर उठ जाएँ क्या

इम्दाद इमाम असर




मुफ़्त बोसा हसीं नहीं देते
दिल जो देते हैं दाम लेते हैं

इम्दाद इमाम असर




मुश्किल का सामना हो तो हिम्मत न हारिए
हिम्मत है शर्त साहिब-ए-हिम्मत से क्या न हो

इम्दाद इमाम असर




तुम्हारे आशिक़ों में बे-क़रारी क्या ही फैली है
जिधर देखो जिगर थामे हुए दो-चार बैठे हैं

इम्दाद इमाम असर




तेरी जानिब से मुझ पे क्या न हुआ
ख़ैर गुज़री कि तू ख़ुदा न हुआ

इम्दाद इमाम असर