तमाम दोस्त अलाव के गिर्द जम्अ थे और
हर एक अपनी कहानी सुनाने वाला था
इदरीस बाबर
फूल है जो किताब में अस्ल है कि ख़्वाब है
उस ने इस इज़्तिराब में कुछ न पढ़ा लिखा तो फिर
इदरीस बाबर
पर नहीं होते ख़यालों के तो फिर
कैसे उड़ते हैं ग़ुबारा समझो
इदरीस बाबर
मिरे सवाल वही टूट-फूट की ज़द में
जवाब उन के वही हैं बने-बनाए हुए
इदरीस बाबर
मौत उकता चुकी रीहरसल में
रोज़ दो चार शख़्स मरते हैं
इदरीस बाबर
मौत की पहली अलामत साहिब
यही एहसास का मर जाना है
इदरीस बाबर
मर गया ख़ास तौर पर मैं भी
जिस तरह आम लोग मरते हैं
इदरीस बाबर
आज तो जैसे दिन के साथ दिल भी ग़ुरूब हो गया
शाम की चाय भी गई मौत के डर के साथ साथ
इदरीस बाबर
मैं जानता हूँ ये मुमकिन नहीं मगर ऐ दोस्त
मैं चाहता हूँ कि वो ख़्वाब फिर बहम किए जाएँ
इदरीस बाबर

