नाले हैं न आहें हैं न रोना न तड़पना
बे-ख़ुद हूँ तिरी याद में फ़ुर्सत के दिन आए
अज़ीज़ हैदराबादी
मुश्किल है इमतियाज़-ए-अज़ाब-ओ-सवाब में
पीता हूँ मैं शराब मिला कर गुलाब में
अज़ीज़ हैदराबादी
कोई रुस्वा कोई सौदाई है
इक जहाँ आप का शैदाई है
अज़ीज़ हैदराबादी
हुस्न है दाद-ए-ख़ुदा इश्क़ है इमदाद-ए-ख़ुदा
ग़ैर का दख़्ल नहीं बख़्त है अपना अपना
अज़ीज़ हैदराबादी
आँखों में तिरी शक्ल है दिल में है तिरी याद
आए भी तो किस शान से फ़ुर्क़त के दिन आए
अज़ीज़ हैदराबादी
गिन रहा हूँ हर्फ़ उन के अहद के
मुझ को धोका दे रही है याद क्या
अज़ीज़ हैदराबादी
दुनिया की रविश देखी तिरी ज़ुल्फ़-ए-दोता में
बनती है ये मुश्किल से बिगड़ती है ज़रा में
अज़ीज़ हैदराबादी
दिल ठिकाने हो तो सब कुछ है अज़ीज़
जी बहल जाता है सहरा क्यूँ न हो
अज़ीज़ हैदराबादी
धड़कते हुए दिल के हम-राह मेरे
मिरी नब्ज़ भी चारा-गर देख लेते
अज़ीज़ हैदराबादी

