नींद का काम गरचे आना है
मेरी आँखों में पर नहीं आती
अनवर देहलवी
नज़र आए क्या मुझ से फ़ानी की सूरत
कि पिन्हाँ हूँ दर्द-ए-निहानी की सूरत
अनवर देहलवी
नाकामी-ए-विसाल का पैग़ाम है मुझे
शीरीं का ज़िक्र भी न करो कोहकन के साथ
अनवर देहलवी
न मैं समझा न आप आए कहीं से
पसीना पोछिए अपनी जबीं से
अनवर देहलवी
मिट्टी ख़राब है तिरे कूचे में वर्ना हम
अब तक तो जिस ज़मीं पे रहे आसमाँ रहे
अनवर देहलवी
अल्लाह-रे फ़र्त-ए-शौक़-ए-असीरी की शौक़ में
पहरों उठा उठा के सलासिल को देखना
अनवर देहलवी
मिरी नुमूद से पैदा है रंग-ए-नाकामी
पिसा हुआ हूँ किसी के हिना लगाने का
अनवर देहलवी
मैं गिरफ़्तार-ए-वफ़ा हूँ छुट के जाऊँगा कहाँ
बाल बाँधा चोर हूँ हर तार-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार का
अनवर देहलवी
कुछ ख़बर होती तो मैं अपनी ख़बर क्यूँ रखता
ये भी इक बे-ख़बरी थी कि ख़बर-दार रहा
अनवर देहलवी

