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शमीम जयपुरी शायरी | शाही शायरी

शमीम जयपुरी शेर

3 शेर

बहुत तवील शब-ए-ग़म है क्या किया जाए
उमीद-ए-सुब्ह बहुत कम है क्या किया जाए

शमीम जयपुरी




दुनिया है कि गोशा-ए-जहन्नम
हर वक़्त अज़ाब-ए-इलाही तौबा

शमीम जयपुरी




मिरी ख़ुशी से मिरे दोस्तों को ग़म है 'शमीम'
मुझे भी इस का बहुत ग़म है क्या किया जाए

शमीम जयपुरी