ऐ बहार तुझ को इस की क्या ख़बर
ऐ निगार तुझ को क्या पता
दिल के फ़ासले कभी न मिट सके
इंतिहा-ए-क़ुर्ब से भी क्या
सब की अपनी अपनी शख़्सियत अलग
सब का अपना अपना ज़ाविया
वो भी फूल थे जो हार बन गए
वो भी फूल था जो जल गया
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नज़्म
दूरी
मुस्तफ़ा ज़ैदी
नज़्म
मुस्तफ़ा ज़ैदी
ऐ बहार तुझ को इस की क्या ख़बर
ऐ निगार तुझ को क्या पता
दिल के फ़ासले कभी न मिट सके
इंतिहा-ए-क़ुर्ब से भी क्या
सब की अपनी अपनी शख़्सियत अलग
सब का अपना अपना ज़ाविया
वो भी फूल थे जो हार बन गए
वो भी फूल था जो जल गया