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ज़िद हमारी दुआ से होती है | शाही शायरी
zid hamari dua se hoti hai

ग़ज़ल

ज़िद हमारी दुआ से होती है

रियाज़ ख़ैराबादी

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ज़िद हमारी दुआ से होती है
हम से क्या अब ख़ुदा से होती है

नामा-बर जाएगा हवा से तेज़
शर्त बाद-ए-सबा से होती है

न जफ़ा से है मेरे दिल को क़रार
न तसल्ली वफ़ा से होती है

सीने से जब उड़ाती है आँचल
खुल के बाद-ए-सबा से होती है

नज़अ में उन से फेर लें आँखें
चार आँख अब क़ज़ा से होती है

सच तो ये है कि रंज-ओ-ग़म से नजात
बादा-ए-जाँ-फ़ज़ा से होती है

चारागर अब दुआ को हाथ उठाएँ
कि अज़िय्यत दवा से होती है

दोनों पिस पिस के रंग लाते हैं
छेड़ दिल से हिना से होती है

ऐ जुनूँ नोक-झोंक का है मज़ा
ख़ार से नक़्श-ए-पा से होती है

बुत उलझते हैं रोज़ मुझ से 'रियाज़'
रोज़ मुझ बा-ख़ुदा से होती है