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ज़रा सी देर में वो जाने क्या से क्या कर दे | शाही शायरी
zara si der mein wo jaane kya se kya kar de

ग़ज़ल

ज़रा सी देर में वो जाने क्या से क्या कर दे

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

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ज़रा सी देर में वो जाने क्या से क्या कर दे
किसे चराग़ बना दे किसे हवा कर दे

मिरे मिज़ाज के कूफ़े पे जिस का क़ब्ज़ा है
ख़बर नहीं कि वो कब मुझ को कर्बला कर दे

ये कौन शख़्स है उस लफ़्ज़ जैसा लगता है
मिरे वजूद के मतलब को जो अदा कर दे