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यूँ मुझ पे जफ़ा हज़ार कीजो | शाही शायरी
yun mujh pe jafa hazar kijo

ग़ज़ल

यूँ मुझ पे जफ़ा हज़ार कीजो

मीर मोहम्मदी बेदार

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यूँ मुझ पे जफ़ा हज़ार कीजो
पर ग़ैर को तो न प्यार कीजो

करते हो तुम वफ़ा की बातें
पर हम से टुक आँखें चार कीजो

आजाइयो यार घर से जल्दी
मत कुश्ता-ए-इंतिज़ार कीजो

क़स्दन तो कहाँ प भूले ही से
ईधर भी कभू गुज़ार कीजो

कोई बात है तुझ से दिल फिरे का
इस को तो मत ए'तिबार कीजो

'बेदार' तू इस जहाँ में आ कर
जो चाहे सो मेरे यार कीजो

पर जिस से गिरे किसू के दिल से
वो काम न इख़्तियार कीजो