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ये दरिया है कि पानी का धुआँ है | शाही शायरी
ye dariya hai ki pani ka dhuan hai

ग़ज़ल

ये दरिया है कि पानी का धुआँ है

जावेद नासिर

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ये दरिया है कि पानी का धुआँ है
कभी आबाद था ख़ाली मकाँ है

मैं आगे जा रहा हूँ पीछे पीछे
पुरानी आदतों की दास्ताँ है

ग़ज़ल अपनी शबाहत खो रही है
मिरा एहसास मुझ से बद-गुमाँ है

मनाज़िर हैं कि दौड़े जा रहे हैं
कोई मज़मूँ नहीं ज़ोर-ए-बयाँ है