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ये आँख क्यूँ है ये हाथ क्या है | शाही शायरी
ye aankh kyun hai ye hath kya hai

ग़ज़ल

ये आँख क्यूँ है ये हाथ क्या है

मुनीर नियाज़ी

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ये आँख क्यूँ है ये हाथ क्या है
ये दिन है क्या चीज़ रात क्या है

फ़िराक़-ए-ख़ुर्शीद-ओ-माह क्यूँ है
ये उन का और मेरा साथ क्या है

गुमाँ है क्या इस सनम-कदे पर
ख़याल-ए-मर्ग-ओ-हयात क्या है

फ़ुग़ाँ है किस के लिए दिलों में
ख़रोश-ए-दरिया-ए-ज़ात क्या है

फ़लक है क्यूँ क़ैद-ए-मुस्तक़िल में
ज़मीं पे हर्फ़-ए-नजात क्या है

है कौन किस के लिए परेशाँ
पता तो दे असल बात क्या है

है लम्स क्यूँ राएगाँ हमेशा
फ़ना में ख़ौफ़-ए-सबात क्या है

'मुनीर' इस शहर-ए-ग़म-ज़दा पर
तिरा ये सेहर-ए-नशात क्या है