यहाँ क्या है वहाँ क्या है इधर क्या है उधर क्या है
कोई समझे तो क्या समझे वो नैरंग-ए-नज़र क्या है
न हो जिस सर में सौदा सरफ़रोशी का वो सर क्या है
न फूंके ख़िर्मन-ए-हस्ती तो वो सोज़-ए-जिगर क्या है
तिरे अंदाज़ के बिस्मिल हैं हम हम से कोई पूछे
तिरी बाँकी अदा क्या है तिरी तिरछी नज़र क्या है
जहाँ सामान वहशत के उसे वहशत-सरा कहिए
जहाँ अस्बाब-ए-वीरानी वो वीराना है घर क्या है
गए वो और ये कहते गए ओ जज़्ब-ए-दिल वाले
मुझे भी देखना है जज़्बा-ए-दिल का असर क्या है
ग़ज़ल
यहाँ क्या है वहाँ क्या है इधर क्या है उधर क्या है
मुबारक अज़ीमाबादी

