यारब जो ख़ार-ए-ग़म हैं जला दे उन्हों के तईं
जो ग़ुंचा-ए-तरब हैं खिला दे उन्हों के तईं
इंकार-ए-हश्र जिन को है ऐ सर्व-ए-ख़ुश-ख़िराम
यक बार अपने क़द को दिखा दे उन्हों के तईं
कहते हैं अबरू-ओ-मिज़ा ख़ूँ-रेज़ हैं तिरी
ज़ालिम कभी हमें भी बता दे उन्हों के तईं
उस शम्अ-रू का मुझ से जो करते हैं सर्द दिल
ऐ आह-ए-सोज़-नाक जला दे उन्हों के तईं
सोज़ाँ है दाग़-ए-हिज्र मिरे दिल में मिस्ल-ए-शम्अ
ऐ याद-ए-वस्ल-ए-यार बुझा दे उन्हों के तईं
करते हैं सर-कशी जो कफ़-ए-पा से आबले
ऐ ख़ार-ए-दश्त-ए-इश्क़ बिठा दे उन्हों के तईं
जो साफ़-ओ-बे-ग़ुबार हैं 'बेदार' आश्ना
जूँ सुर्मा अपनी चश्म में जा दे उन्हों के तईं
ग़ज़ल
यारब जो ख़ार-ए-ग़म हैं जला दे उन्हों के तईं
मीर मोहम्मदी बेदार

