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वो मेरा दर्द-ए-दिल क्या जानते हैं | शाही शायरी
wo mera dard-e-dil kya jaante hain

ग़ज़ल

वो मेरा दर्द-ए-दिल क्या जानते हैं

मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल

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वो मेरा दर्द-ए-दिल क्या जानते हैं
तड़पने को तमाशा जानते हैं

बहार-ए-गुल है ख़ार आँखों में तुझ बिन
चमन को हम तो सहरा जानते हैं

कहें क्या हाल-ए-दिल अपना बुतों से
जो है दिल में तमन्ना जानते हैं

सताना क़त्ल करना फिर जलाना
वो बे-तालीम क्या क्या जानते हैं

मलें हम क्यूँ न आँखें बर्ग-ए-गुल से
इसे तेरा कफ़-ए-पा जानते हैं

रक़ीबों पर सितम इतना न कीजे
उन्हें भी आप हम सा जानते हैं

यहाँ तक इज्ज़ के ख़ूगर हैं 'ग़ाफ़िल'
बुरों को भी हम अच्छा जानते हैं