EN اردو
वक़्त साकिन है मैं गुज़र रहा हूँ | शाही शायरी
waqt sakin hai main guzar raha hun

ग़ज़ल

वक़्त साकिन है मैं गुज़र रहा हूँ

अब्दुर्रहमान मोमिन

;

वक़्त साकिन है मैं गुज़र रहा हूँ
मैं तो इस आगही से मर रहा हूँ

बोल कर जो मुझे दबा रहा है
उस की आवाज़ से उभर रहा हूँ

आइना मुझ को देख कर चुप है
जाने मैं किस से बात कर रहा हूँ

मैं ये समझा था वो ठहर रहा है
वे ये समझा था मैं ठहर रहा हूँ

इक परिंदा बनाया काग़ज़ पर
और अब उस के पर कतर रहा हूँ

उस ने वा'दा नहीं लिया मुझ से
और कहता है मैं मुकर रहा हूँ

तेरी तस्वीर ना-मुकम्मल है
मैं अभी इस में रंग भर रहा हूँ

जो तुझे जानता नहीं 'मोमिन'
वो समझता है तुझ से डर रहा हूँ