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वक़्त की तह में उतर जाऊँगा | शाही शायरी
waqt ki tah mein utar jaunga

ग़ज़ल

वक़्त की तह में उतर जाऊँगा

जमील यूसुफ़

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वक़्त की तह में उतर जाऊँगा
मैं भी लम्हा हूँ गुज़र जाऊँगा

अब जो निकला हूँ तिरे ख़्वाब लिए
ता-बा-इमकान-ए-नज़र जाऊँगा

तू हर इक शय में मिलेगा मुझ को
तुझ को पाऊँगा जिधर जाऊँगा

वो भी दिन थे कि गुमाँ होता था
तुझ से बिछड़ुँगा तो मर जाऊँगा

तू मिरा हमदम-ओ-हमराज़ न बन
मैं तो नश्शा हूँ उतर जाऊँगा