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वक़्त की इंतिहा तलक वक़्त की जस्त 'अमीर-इमाम' | शाही शायरी
waqt ki intiha talak waqt ki jast amir-imam

ग़ज़ल

वक़्त की इंतिहा तलक वक़्त की जस्त 'अमीर-इमाम'

अमीर इमाम

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वक़्त की इंतिहा तलक वक़्त की जस्त 'अमीर-इमाम'
हस्त की बूद 'अमीर-इमाम' बूद की हस्त 'अमीर-इमाम'

हिज्र का माहताब है नींद न कोई ख़्वाब है
तिश्ना-लबी शराब है नश्शे में मस्त 'अमीर-इमाम'

सख़्त बहुत है मरहला देखिए क्या हो फ़ैसला
तेग़-ब-कफ़ हक़ीक़तें क़ल्ब-ब-दस्त 'अमीर-इमाम'

ज़ख़्म बहुत मिले मगर आज भी है उठाए सर
देख जहान-ए-फ़ित्ना-गर तेरी शिकस्त 'अमीर-इमाम'

उस के तमाम हम-सफ़र नींद के साथ जा चुके
ख़्वाब-कदे में रह गया ख़्वाब-परस्त 'अमीर-इमाम'