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उठ के लोगों से किनारे आइए | शाही शायरी
uTh ke logon se kinare aaiye

ग़ज़ल

उठ के लोगों से किनारे आइए

मीर मोहम्मदी बेदार

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उठ के लोगों से किनारे आइए
कुछ हमें कहना है प्यारे आइए

गर इजाज़त हो तो परवाना की तरह
सदक़ा होने को तुम्हारे आइए

मुद्दतों से आरज़ू ये दिल में है
एक दिन तू घर हमारे आइए

कुछ तो की तासीर नाला ने मिरे
आए तुम मुद्दत में बारे आइए

आप की कल याद में 'बेदार' को
गिनते गुज़री रात तारे आइए