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उश्शाक़ में नाम हो चुका है | शाही शायरी
ushshaq mein nam ho chuka hai

ग़ज़ल

उश्शाक़ में नाम हो चुका है

दत्तात्रिया कैफ़ी

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उश्शाक़ में नाम हो चुका है
'कैफ़ी' बदनाम हो चुका है

क्या पूछते हो मरीज़-ए-ग़म को
काम उस का तमाम हो चुका है

आशिक़ का न इम्तिहाँ लो वो तो
बंदा-ए-बे-दाम हो चुका है

क्यूँ हम से न मुँह छुपा के जाएँ
हाँ आप का काम हो चुका है

क्या काम हमें रहा किसी से
जब अपना ही काम हो चुका है

'कैफ़ी' कब तक ये ख़्वाब-ए-ग़फ़लत
मेहर लब-ए-बाम हो चुका है