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उस से भी ऐसी ख़ता हो ये ज़रूरी तो नहीं | शाही शायरी
us se bhi aisi KHata ho ye zaruri to nahin

ग़ज़ल

उस से भी ऐसी ख़ता हो ये ज़रूरी तो नहीं

सय्यद शकील दस्नवी

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उस से भी ऐसी ख़ता हो ये ज़रूरी तो नहीं
वो भी मजबूर-ए-वफ़ा हो ये ज़रूरी तो नहीं

लोग चेहरे पे कई चेहरे चढ़ा लेते हैं
वो भी खुल कर ही मिला हो ये ज़रूरी तो नहीं

अब के जब उस से मिलो हाथ दबा कर देखो
अब भी वो तुम से ख़फ़ा हो ये ज़रूरी तो नहीं

जुस्तुजू किस की है ये दश्त-ए-फ़ना के इस पार
वो कोई और रहा हो ये ज़रूरी तो नहीं

दार पे खींचे गए कितने ज़माने में 'शकील'
हर कोई ईसा रहा हो ये ज़रूरी तो नहीं