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उस की याद और दर्द की सौग़ात मेरे साथ थी | शाही शायरी
uski yaad aur dard ki saughat mere sath thi

ग़ज़ल

उस की याद और दर्द की सौग़ात मेरे साथ थी

यहया ख़ालिद

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उस की याद और दर्द की सौग़ात मेरे साथ थी
उस से बढ़ कर एक तन्हा रात मेरे साथ थी

मुझ को तन्हाई में भी एहसास-ए-तन्हाई न था
हर गली में गर्दिश-ए-हालात मेरे साथ थी

रफ़्ता रफ़्ता बंद कलियों के भी लब खुलने लगे
आब-ए-सब्र ओ हिद्दत-ए-इसबात मेरे साथ थी

बंद खिड़की पर भी 'ख़ालिद' एक दिन पहरे लगे
ऐसी भी कुछ सूरत-ए-हालात मेरे साथ थी