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उन का जल्वा नहीं देखा जाता | शाही शायरी
un ka jalwa nahin dekha jata

ग़ज़ल

उन का जल्वा नहीं देखा जाता

हसन बरेलवी

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उन का जल्वा नहीं देखा जाता
देख देखा नहीं देखा जाता

क़त्ल करने की वो जल्दी थी तुम्हें
अब तड़पना नहीं देखा जाता

चश्म-ए-ख़ूँ-बार ख़ुदा रहम करे
तेरा रोना नहीं देखा जाता

उल्फ़त उनकी नहीं छोड़ी जाती
हाल दिल का नहीं देखा जाता

देखने ही के लिए हैं आँखें
उन से क्या क्या नहीं देखा जाता

पर तिरी बर्क़-ए-तजल्ली का जमाल
ख़ूब देखा नहीं देखा जाता

नामा पूरा वो 'हसन' क्या देखें
नाम पूरा नहीं देखा जाता