तू हम से जो हम-शराब होगा
बहुतों का जिगर कबाब होगा
ढूँढेगा सहाब छुपने को मेहर
जिस रोज़ वो बे-नक़ाब होगा
ख़ूबाँ से न कर मोहब्बत ऐ दिल
आमान कहाँ ख़राब होगा
ऐ मर्ग शिताब कह तू मुझ से
उस ज़ीस्त को कब जवाब होगा
बोसा दे 'सोज़' को मिरी जान
मतलब तेरा शिताब होगा
ग़ज़ल
तू हम से जो हम-शराब होगा
मीर सोज़

