तू अगर दिल में एक बार आए
उम्र भर के लिए क़रार आए
आशियाना ही गुल्सिताँ में नहीं
अब ख़िज़ाँ आए या बहार आए
वो न आएँ तो ऐ दम-ए-आख़िर
लब पे नाम उन का बार बार आए
मौत ने आसरा दिया भी तो कब
जब मुसीबत के दिन गुज़ार आए
यास कहती है कुछ तमन्ना कुछ
किस की बातों पे ए'तिबार आए
ये तो कुछ तल्ख़ थी मिरे साक़ी
अब जो आए वो ख़ुश-गवार आए
उस को तेरा पयाम्बर समझूँ
मौत अगर वक़्त-ए-इंतिज़ार आए
'अर्श' वो बे-क़रारियाँ न रहीं
दिल को अब किस तरह क़रार आए
ग़ज़ल
तू अगर दिल में एक बार आए
अर्श मलसियानी

