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तुझे नक़्श-ए-हस्ती मिटाया तो देखा | शाही शायरी
tujhe naqsh-e-hasti miTaya to dekha

ग़ज़ल

तुझे नक़्श-ए-हस्ती मिटाया तो देखा

ममनून निज़ामुद्दीन

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तुझे नक़्श-ए-हस्ती मिटाया तो देखा
जो पर्दा था हाइल उठाया तो देखा

ये सब तेरे ही हुस्न का परतव है
न देखा तुझे तेरा साया तो देखा

बुरा मानिए मत मिरे देखने से
तुम्हें हक़ ने ऐसा बनाया तो देखा

न हूँ क्यूँकि 'ममनून' पीर-ए-मुग़ाँ का
ये आलम जो साग़र पिलाया तो देखा