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तिरा हम ने जिस को तलबगार देखा | शाही शायरी
tera humne jis ko talabgar dekha

ग़ज़ल

तिरा हम ने जिस को तलबगार देखा

मीर सोज़

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तिरा हम ने जिस को तलबगार देखा
उसे अपनी हस्ती से बे-ज़ार देखा

अदा ही की हसरत में सब मर गए सच
तजल्ली को किस ने ब-तकरार देखा

तिरी आँख भर जिस ने तस्वीर देखी
वो तस्वीर सा नक़्श-ए-दीवार देखा

अजब कुछ ज़माने की है रस्म यारो
जो है काम का उस को बेकार देखा

व-लेकिन अचम्भा बड़ा मुझ को ये है
कि टुक 'सोज़' का गर्म बाज़ार देखा