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तेरी मदद से तेरा इदराक हो सके है | शाही शायरी
teri madad se tera idrak ho sake hai

ग़ज़ल

तेरी मदद से तेरा इदराक हो सके है

मीर हसन

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तेरी मदद से तेरा इदराक हो सके है
वर्ना इस आदमी से किया ख़ाक हो सके है

तू ही समझ समझ कर कर दे माफ़ हम को
तेरा हिसाब हम से कब पाक हो सके है

ख़तरा नहीं किसी का जो चाहे कर सके है
तुझ सा कोई जहाँ में बेबाक हो सके है

रोने को मेरे जल्दी टुक देख खोल आँखें
अब तक है चश्म मेरी नमनाक हो सके है

लाखों का दिल जलाया लाखों का जी खपाया
तुझ से कोई ज़ियादा सफ़्फ़ाक हो सके है

वो जल्द दस्तियों के जाते रहे ज़माने
अब हाथ से गरेबाँ कब चाक हो सके है

जो कुछ शराब में हैं कैफ़िय्यतें नशे की
तुझ में मज़ा ये कोई तिरयाक हो सके है

उस माह-रू को बाहम कर दे 'हसन' से इक शब
गर्दिश से तेरी इतना अफ़्लाक हो सके है