तस्वीर-ए-रू-ए-यार दिखाना बसंत का
अटखेलियों से दिल को लुभाना बसंत का
हर सम्त सब्ज़ा-ज़ार बिछाना बसंत का
फूलों में रंग-ओ-बू को लुटाना बसंत का
रश्क-ए-जिनाँ चमन को बनाना बसंत का
हर हर कली में रंग दिखाना बसंत का
पैग़ाम-ए-लुत्फ़-ए-ख़ास सुनाना बसंत का
दरिया-ए-फ़ैज़-ए-आम बहाना बसंत का
क़ुदरत की बरकतें हैं ख़ज़ाना बसंत का
क्या ख़ूब क्या अजीब ज़माना बसंत का
दिल को बहुत अज़ीज़ है आना बसंत का
'रहबर' की ज़िंदगी में समाना बसंत का
ग़ज़ल
तस्वीर-ए-रू-ए-यार दिखाना बसंत का
जितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर

