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तड़पते दिल को न ले इज़्तिराब लेता जा | शाही शायरी
taDapte dil ko na le iztirab leta ja

ग़ज़ल

तड़पते दिल को न ले इज़्तिराब लेता जा

आरज़ू लखनवी

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तड़पते दिल को न ले इज़्तिराब लेता जा
पटक दे साग़र-ए-ख़ाली शराब लेता जा

वो हाथ मार पलट कर जो कर दे काम तमाम
बड़े अज़ाब में हूँ मैं सवाब लेता जा

वो बन ही घर से है अच्छा सुकून जिस में मिले
मुझे भी ओ दिल-ए-ख़ाना-ख़राब लेता जा

मिले इक आह का वक़्फ़ा तो वक़्त-ए-पुरशिश-ए-हाल
हर इक सवाल का अपने जवाब लेता जा

नक़ाब उठा के किया सामना तो मुँह को न फेर
दिखा के ख़्वाब न आँखों से ख़्वाब लेता जा