ताज़ा तसल्लियों से पुराने सवाल कर
शाइस्ता-ए-अज़ाब ज़रा देख भाल कर
उड़ती है आसमान में रंगों की धूल क्यूँ
देखेंगे हम हवा को हवा में उछाल कर
दिल पर अजीब गर्द है आँखों में है ग़ुबार
दो-चार काम आज तो फ़ुर्सत निकाल कर
आपस में लड़ पड़े हैं किसी मसअले पे लोग
अपना भी एक शख़्स है पत्थर सँभाल कर
ग़ज़ल
ताज़ा तसल्लियों से पुराने सवाल कर
जावेद नासिर

