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सुब्ह सफ़र और शाम सफ़र | शाही शायरी
subh safar aur sham safar

ग़ज़ल

सुब्ह सफ़र और शाम सफ़र

अब्दुल मन्नान तरज़ी

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सुब्ह सफ़र और शाम सफ़र
हस्ती का अंजाम सफ़र

ऊँचे नाम से क्या होता है
करना है बे-नाम सफ़र

सुनिए ख़िज़ाँ से क्या कहती है
गुल गुलशन गुलफ़ाम सफ़र

चांद-सितारे और हवा
किस को है आराम सफ़र

बचिए बचिए उस से बचिए
कर दे जो बदनाम सफ़र

गाहे काम बिगाड़े भी है
गाहे आवे काम सफ़र

खिल नहीं पाए और मुरझाए
हाए रे बे-हंगाम सफ़र

कैसा सौदा सर में समाया
साल-ओ-मह-ओ-अय्याम सफ़र

शिकवा है बे-बाल-ओ-परी का
देखिए ज़ेर-ए-दाम सफ़र

तुम भी रहो तय्यार ही 'तरज़ी'
'ग़ालिब' और 'ख़य्याम' सफ़र