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शुक्रिया तेरा कि ग़म का हौसला रहने दिया | शाही शायरी
shukriya tera ki gham ka hausla rahne diya

ग़ज़ल

शुक्रिया तेरा कि ग़म का हौसला रहने दिया

मज़हर इमाम

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शुक्रिया तेरा कि ग़म का हौसला रहने दिया
बे-असर कर दी दुआ दस्त-ए-दुआ रहने दिया

मुंसिफ़ी का शोर-ए-महशर गूँजता रहने दिया
सब दलीलों को सुना और फ़ैसला रहने दिया

ऐ ख़ुदा मम्नून हूँ तेरा कि मेरे फूल में
तू ने ख़ुशबू-ए-हवस रंग-ए-वफ़ा रहने दिया

कुछ इशारे इतने मुबहम इतने वाज़ेह इतने शोख़
दास्ताँ सारी सुना दी मुद्दआ रहने दिया

एक नाज़-ए-बे-तकल्लुफ़ मेरे तेरे दरमियाँ
दूरियाँ सारी मिटा दीं फ़ासला रहने दिया