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साज़ दे के तारों को छेड़ तो दिया तुम ने | शाही शायरी
saz de ke taron ko chheD to diya tumne

ग़ज़ल

साज़ दे के तारों को छेड़ तो दिया तुम ने

फ़रीद जावेद

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साज़ दे के तारों को छेड़ तो दिया तुम ने
साज़-ए-दिल के तारों की बात भी सुनी होती

हम जो शो'ला-ए-जाँ की लौ न तेज़ कर देते
आज ग़म की राहों में कितनी तीरगी होती

उन से छेड़ देते हम रंग-ओ-नूर की बातें
दास्तान-ए-शौक़ अपनी ख़ुद ही छिड़ गई होती

शिकवा-ए-करम क्यूँ है वो अगर करम करते
और भी मोहब्बत की प्यास बढ़ गई होती

अहल-ए-दिल वहाँ से भी नग़्मा-ज़न गुज़र आए
लय जहाँ मोहब्बत की टूट ही गई होती