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साहब दिलों से राह में आँखें मिला के देख | शाही शायरी
sahab dilon se rah mein aankhen mila ke dekh

ग़ज़ल

साहब दिलों से राह में आँखें मिला के देख

फ़ुज़ैल जाफ़री

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साहब दिलों से राह में आँखें मिला के देख
रखता है तू भी दिल तो उसे आज़मा के देख

पहचानने की प्यार को कोशिश कभी तो कर
ख़ुद को कभी तो अपने बदन से हटा के देख

या लज़्ज़तों को ज़हर समझ और दूर रह
या शो'ला-ए-गुनाह में दामन जला के देख

हर-चंद रेग-ज़ार सही ज़िंदगी मगर
पल-भर को अपने जिस्म का जादू जगा के देख

साए की तरह साथ चलेगी कोई सदा
सुनसान जंगलों में अकेले भी जा के देख