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रस्मन ही उन को नाला-ए-दिल की ख़बर तो हो | शाही शायरी
rasman hi un ko nala-e-dil ki KHabar to ho

ग़ज़ल

रस्मन ही उन को नाला-ए-दिल की ख़बर तो हो

सीमाब अकबराबादी

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रस्मन ही उन को नाला-ए-दिल की ख़बर तो हो
यानी असर न हो तो फ़रेब-ए-असर तो हो

हम भी तुम्हारी बज़्म में हैं दर-ख़ुर-ए-करम
अच्छा वो मुस्तक़िल न सही इक नज़र तो हो

क्या फ़र्ज़ है कि हम न हों तक़दीर-आज़मा
दुनिया पड़ी हुई है दर-ए-यार पर तो हो

सब कह रहे हैं हम पे गिराँ है शब-ए-फ़िराक़
इस का भी कुछ इलाज करेंगे सहर तो हो

'सीमाब' आधी रात को आएँ वो बे-क़रार
तेरी दुआ-ए-दनीम-शबी में असर तो हो