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रंग-ए-गुल-ए-शगुफ़्ता हूँ आब-ए-रुख़-ए-चमन हूँ मैं | शाही शायरी
rang-e-gul-e-shagufta hun aab-e-ruKH-e-chaman hun main

ग़ज़ल

रंग-ए-गुल-ए-शगुफ़्ता हूँ आब-ए-रुख़-ए-चमन हूँ मैं

मिर्ज़ा मोहम्मद तक़ी हवस

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रंग-ए-गुल-ए-शगुफ़्ता हूँ आब-ए-रुख़-ए-चमन हूँ मैं
शम-ए-हरम चराग़-ए-दैर क़श्क़ा-ए-बरहमन हूँ मैं

कसरत-ए-जौर-ए-यार से सब हैं ये मेरे जुज़्व-ए-तन
सोज़-ओ-मलाल-ओ-यास-ओ-दर्द रंज-ओ-ग़म-ओ-मेहन हूँ मैं

मैं हूँ नसीम तो बहार मैं हूँ शमीम ज़ुल्फ़-ए-यार
गो कि नज़र से हूँ निहाँ दाख़िल-ए-अंजुमन हूँ मैं

सर्व-नशीं और हैं शाख़-नशीं गुल और हैं
क़ुमरी-ए-आशियाँ-ख़राब बुलबुल-ए-बे-वतन हूँ मैं

ख़ंदा-ज़नाँ हैं तुझ पे गो ये ख़िरदान-ए-रोज़गार
अहल-ए-ख़िरद में ऐ 'हवस' रौनक़-ए-अंजुमन हूँ में