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रहगुज़र रहगुज़र से पूछ लिया | शाही शायरी
rahguzar rahguzar se puchh liya

ग़ज़ल

रहगुज़र रहगुज़र से पूछ लिया

अर्श मलसियानी

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रहगुज़र रहगुज़र से पूछ लिया
तेरा घर सब के घर से पूछ लिया

जो ज़बाँ से न कर सके वो बयाँ
हम ने उन की नज़र से पूछ लिया

गुमरही और बढ़ गई अपनी
रास्ता राहबर से पूछ लिया

जब ज़मीं ने दिया न तेरा पता
हम ने शम्स ओ क़मर से पूछ लिया

तुम न आओ न आएगी रौनक़
हम ने दीवार-ओ-दर से पूछ लिया

मेरी चुप को वो क्या समझते हैं
राज़ जब चश्म-ए-तर से पूछ लिया

इल्म का राज़ 'अर्श' बस ये है
कुछ इधर कुछ उधर से पूछ लिया