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पौ फटी एक ताज़ा कहानी मिली | शाही शायरी
pau phaTi ek taza kahani mili

ग़ज़ल

पौ फटी एक ताज़ा कहानी मिली

फ़ारूक़ शफ़क़

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पौ फटी एक ताज़ा कहानी मिली
ख़ैरियत उस की दिन की ज़बानी मिली

कोई राहत न हम को ज़मीनी मिली
जो भी सौग़ात थी आसमानी मिली

क़ैद-ए-दीवार-ओ-दर से जो महफ़ूज़ है
ऐसे घर की हमें पासबानी मिली

कोई पत्ता न खड़का कहीं रात-भर
हर तरफ़ ख़ौफ़ की हुक्मरानी मिली

और भी लोग थे शहर-ए-बीमार में
इक हमीं को मगर तर्जुमानी मिली