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पास अपने इक जान है साईं | शाही शायरी
pas apne ek jaan hai sain

ग़ज़ल

पास अपने इक जान है साईं

रसा चुग़ताई

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पास अपने इक जान है साईं
बाक़ी ये दीवान है साईं

जिस का कोई मोल न गाहक
कैसी ये दूकान है साईं

आँसू और पलक तक आए
आँसू अग्नी-बान है साईं

जोगी से और जग की बातें
जोगी का अपमान है साईं

मैं झूटा तो दुनिया झूटी
मेरा ये ईमान है साईं

जैसा हूँ जिस हाल में हूँ मैं
अल्लाह का एहसान है साईं