नहीं मो'तक़िद जो तिरे दीद का
मैं दीवाना हूँ उस की फ़हमीद का
तअल्लुक़ किसी से नहीं ग़ैर-ए-हक़
ये आलम हुआ अपनी तजरीद का
ख़याल-ए-दो-आलम हुआ दिल से दूर
यहाँ वक़्र किया जाम-ए-जमशेद का
हम-आग़ोश वो मुझ से हो या न हो
दिवाना हूँ मैं दीद वा दीद का
यहाँ ना-मुरादी है ऐन-ए-मुराद
न हो बारवर नख़्ल उम्मीद का
ये कूचे में लैला के मजनूँ न हो
इरम में है गोया शजर बेद का
तिरा शेर 'जोशिश' तुझे है पसंद
तू मुहताज है किस की ताईद का
ग़ज़ल
नहीं मो'तक़िद जो तिरे दीद का
जोशिश अज़ीमाबादी

