EN اردو
नहीं कम अफ़्व-ए-यज़्दानी बहुत है | शाही शायरी
nahin kam afw-e-yazdani bahut hai

ग़ज़ल

नहीं कम अफ़्व-ए-यज़्दानी बहुत है

महमूद राय बरेलवी

;

नहीं कम अफ़्व-ए-यज़्दानी बहुत है
गुनाहों पर पशेमानी बहुत है

कोई तो हादिसा गुज़रा है दिल पर
शब-ए-ग़म आज नूरानी बहुत है

दिलों पर तह-ब-तह ज़ुल्मत के पर्दे
जबीं पर नूर-ए-ईमानी बहुत है

इधर ही तिश्ना-ए-दीदार कम हैं
उधर तो जल्वा-सामानी बहुत है

किसे रास आए सौदा-ए-मोहब्बत
मुनाफ़े' कम परेशानी बहुत है

ज़बाँ है रहन-ए-ज़िक्र-ए-हूर-ओ-ग़िल्माँ
ख़याल-ए-पाक-दामानी बहुत है

करो 'महमूद' क़िस्मत पर क़नाअ'त
जो मिल जाए ब-आसानी बहुत है