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नहीं है अगर उन में बारिश हवा | शाही शायरी
nahin hai agar un mein barish hawa

ग़ज़ल

नहीं है अगर उन में बारिश हवा

ख़ालिद महमूद

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नहीं है अगर उन में बारिश हवा
उठा बादलों की नुमाइश हवा

गहे बर्फ़ है गाह आतिश हवा
तुझे क्यूँ है दिल्ली से रंजिश हवा

मैं गुंजान शहरों का मारा हुआ
नवाज़िश नवाज़िश नवाज़िश हवा

तिरे साथ चलने की आदत नहीं
हमारी न कर आज़माइश हवा

शिकस्ता सफ़ीना मुसाफ़िर निढाल
तलातुम शब-ए-तार बारिश हवा

अब अश्क ओ तपिश चश्म ओ दिल में नहीं
थे यकजा कभी आब ओ आतिश हवा