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नफ़स नफ़स ने उड़ाईं हवाइयाँ क्या क्या | शाही शायरी
nafas nafas ne uDain hawaiyan kya kya

ग़ज़ल

नफ़स नफ़स ने उड़ाईं हवाइयाँ क्या क्या

हनीफ़ अख़गर

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नफ़स नफ़स ने उड़ाईं हवाइयाँ क्या क्या
ब-रंग-ए-इश्क़ हुईं जग-हँसाइयाँ क्या क्या

हमीं ने इश्क़ को हुस्न-ए-अना का रंग दिया
हमीं पे इश्क़ में आईं बुराइयाँ क्या क्या

मिरे तक़द्दुस-ए-ईमाँ से खेलती ही रहीं
तिरी निगाह की काफ़िर-अदाइयाँ क्या क्या

सुकूँ-गिरफ़्ता न दिल ही न आँख ख़ूँ-बस्ता
तमाम उम्र रहीं ना-रसाइयाँ क्या क्या

जुदाइयों से भी उक़दे रफ़ाक़तों के खुले
रफ़ाक़तों में भी आईं जुदाइयाँ क्या क्या

है आह एक ग़ज़ल अश्क इक क़सीदा है
निहाँ हैं ग़म में भी नग़्मा-सराइयाँ क्या क्या

रफ़ीक़ मुझ सा कहीं पाएगी न ऐ 'अख़्गर'
मचाएगी शब-ए-हिज्राँ दुहाइयाँ क्या क्या