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नाले में कभी असर न आया | शाही शायरी
nale mein kabhi asar na aaya

ग़ज़ल

नाले में कभी असर न आया

बेखुद बदायुनी

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नाले में कभी असर न आया
इस नख़्ल में कुछ समर न आया

अल्लाह-री मेरी बे-क़रारी
चैन उन को भी रात भर न आया

कहता हूँ कि आ ही जाएगा सब्र
ये फ़िक्र भी है अगर न आया

ग़फ़लत के पड़े हुए थे पर्दे
वो पास रहा नज़र न आया

आँखों से हुआ जो कोई ओझल
'बेख़ुद' मुझे कुछ नज़र न आया