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मुबारक साक़ी-ए-मस्ताँ मुबारक | शाही शायरी
mubarak saqi-e-mastan mubarak

ग़ज़ल

मुबारक साक़ी-ए-मस्ताँ मुबारक

बेदम शाह वारसी

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मुबारक साक़ी-ए-मस्ताँ मुबारक
फ़रोग़-ए-मज्लिस-ए-रिंदाँ मुबारक

जबीन-ए-शौक़ के सज्दों पे सज्दे
तुझे संग-ए-दर-ए-जानाँ मुबारक

तजल्ली-ए-जमाल-ए-रू-ए-जानाँ
तुझे ऐ दीदा-ए-हैराँ मुबारक

अदा-ए-दिलबरी ओ दिल-नवाज़ी
तुझे ऐ ख़ुसरव-ए-ख़ूबाँ मुबारक

रिदा-ए-ख़्वाजगी ताज-ए-विलायत
तुम्हें ऐ मुर्शिद-ए-दौराँ मुबारक

किसी के ज़ख़्म-हा-ए-दिल को या-रब
किसी की जुम्बिश-ए-मिज़्गाँ मुबारक

दर-ए-'वारिस' पे है 'बेदम' का बिस्तर
तिरी जन्नत तुझे रिज़वाँ मुबारक