मिरी मस्ती के अफ़्साने रहेंगे
जहाँ गर्दिश में पैमाने रहेंगे
निकाले जाएँगे अहल-ए-मोहब्बत
अब इस महफ़िल में बेगाने रहेंगे
यही अंदाज़-ए-मय-नोशी रहेगा
तो ये शीशे न पैमाने रहेंगे
रहेगा सिलसिला दार-ओ-रसन का
जहाँ दो चार दीवाने रहेंगे
जिन्हें गुलशन में ठुकराया गया है
उन्ही फूलों के अफ़्साने रहेंगे
ख़िरद ज़ंजीर पहनाती रहेगी
जो दीवाने हैं दीवाने रहेंगे
ग़ज़ल
मिरी मस्ती के अफ़्साने रहेंगे
कलीम आजिज़

