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मेरे दिल में उतर गया सूरज | शाही शायरी
mere dil mein utar gaya suraj

ग़ज़ल

मेरे दिल में उतर गया सूरज

जावेद अख़्तर

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मेरे दिल में उतर गया सूरज
तीरगी में निखर गया सूरज

दर्स दे कर हमें उजाले का
ख़ुद अँधेरे के घर गया सूरज

हम से व'अदा था इक सवेरे का
हाए कैसा मक्र गया सूरज

चाँदनी अक्स चाँद आईना
आईने में सँवर गया सूरज

डूबते वक़्त ज़र्द था उतना
लोग समझे कि मर गया सूरज