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मौत का क्यूँ कर ए'तिबार आए | शाही शायरी
maut ka kyun kar eatibar aae

ग़ज़ल

मौत का क्यूँ कर ए'तिबार आए

शाहिद इश्क़ी

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मौत का क्यूँ कर ए'तिबार आए
कि शब-ए-ग़म भी हम गुज़ार आए

किसी हीले किसी बहाने हम
कू-ए-जानाँ में बार बार आए

एक ख़ू-ए-वफ़ा के रिश्ते से
याद कितने सितम-शिआ'र आए

किस को होती नहीं है जान अज़ीज़
हम मगर फिर भी सू-ए-दार आए

उन से तर्क-ए-वफ़ा करें क्यूँ कर
जिन पे बे-इख़्तियार प्यार आए