EN اردو
मरज़-ए-इश्क़ दिल को ज़ोर लगा | शाही शायरी
maraz-e-ishq dil ko zor laga

ग़ज़ल

मरज़-ए-इश्क़ दिल को ज़ोर लगा

मीर असर

;

मरज़-ए-इश्क़ दिल को ज़ोर लगा
जाँ-ब-लब हूँ ख़याल-ए-गोर लगा

बे-तरह कुछ घुला ही जाता है
शम्अ की तरह दिल को चोर लगा

तेरे मुखड़े को यूँ तके है दिल
चाँद के जूँ रहे चकोर लगा

दर-ओ-दीवार पर हर एक तरफ़
आँसुओं से 'असर' के शोर लगा